
क्यों चीन है भारत के लिए पाकिस्तान से भी बड़ा खतरा?
आधुनिक विश्व के नक्शे पर चीन एक ऐसा देश बनकर उभरा है जिसकी सीमाएं स्थिर नहीं, बल्कि ‘खिसकती’ रहती हैं। पिछले 75 वर्षों का इतिहास गवाह है कि चीन ने अपने पड़ोसियों की जमीन हड़पने के लिए ऐतिहासिक दावों को हथियार बनाया है। सभी पड़ोसी देश चीन की इस जमीन हड़पो नीति का शिकार रहे हैं। इस तरह से देखा जाए तो अमेरिका भले दुनिया का सबसे बड़ा गुंडा हो, पर चीन दुनिया का सबसे बड़ा भूमाफिया है (China: The World’s Biggest Land Grabber)। एक भारतीय के रूप में हम पाकिस्तान के खतरे से तो परिचित हैं पर चीन की चालबाजियों को आम जनमानस अभी समझ नहीं पाया है। ताइवान के साथ ही नेपाल, भूटान व भारत का हिमालयी क्षेत्र चीन के अब भी निशाने पर हैं। आइए समझते हैं, चीन ने किस तरह पड़ोसी देशों की जमीनें हथियाई। हाल ही में चीन ने पीओके स्थित शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) को अपना बताते हुए वहां सैन्य गतिविधियां बढ़ा दीं। इसने चीन को लेकर आसन्न खतरे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया। आइए समझते हैं भूमाफिया चीन की करतूतें।
1949 में कम्युनिस्ट शासन के उदय से ही भूमाफिया बना चीन (China: The World’s Biggest Land Grabber)
Understanding China’s Actions: A Deep Dive into the China: The World’s Biggest Land Grabber Policy
चीन ने वर्ष 1949 में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट क्रांति होने के साथ ही आसपास के देशों या पड़ोसियों पर गुंडई दिखाना शुरू कर दिया था। सबसे पहले चीन ने पूर्वी तुर्कस्तान को 1949 में पूरी तरह हड़प लिया और इसे शिंजियांग प्रांत बना कर अपने में शामिल कर लिया।
शांत लामाओं का किया दमन, तिब्बत कब्जाया । Tibet: Peaceful Land, Violent Occupation
तुर्कस्तान के बाद चीन (China: The World’s Biggest Land Grabber) ने तिब्बत को अपना अगला शिकार बनाया। 1950 में चीन ने तिब्बत पर आक्रमण कर दिया और 1951 में ’17-सूत्री समझौते’ के माध्यम से उसे जबरन अपने नियंत्रण में ले लिया। तिब्बत जो कि बौद्ध लामाओं का देश रहा है जो दुनिया भर में शांति के प्रतीक माने जाते हैं। चीन ने शस्त्र से उन लामाओं को तिब्बत से मिटा दिया। 1959 में दलाई लामा के भारत पलायन के बाद चीन ने तिब्बत की सांस्कृतिक पहचान को पूरी तरह मिटाना शुरू कर दिया। तिब्बत की एक बहुत बड़ी आबादी भारत में रह कर अपनी सांस्कृतिक धार्मिक विरासत को संरक्षित रखने का प्रयास कर रही है।
भारत की पीठ में 1962 में भोंका खंजर । Indo-china-war-1962
चीन ने 1962 में ही भारत की पीठ में खंजर भोंक दिया। हिन्दी चीनी भाई भाई के नारे लगाने वाले भारत पर चीन ने आक्रमण कर दिया और अक्साई चिन करीब *38,000 वर्ग किलोमीटर* क्षेत्र पर कब्जा कर लिया।
मंगोलिया के एक हिस्से पर भी किया कब्जा
चीन (China Land Grabber) पूरे मंगोलियया को अपना हिस्सा मानता रहा है। रशिया के दबाव में 1962 में चीन ने मंगोलिया के साथ सीमा समझौता किया। इसके बाद दोनो देशों की सीमाएं निर्धारित हो गईं। इसमें मंगोलिया का एक क्षेत्र जिसे इनर मंगोलिया कहा जाता है, उसे चीन ने स्वायत्त शासी क्षेत्र घोषित किया। इस क्षेत्र में चीन मंगोलियाई संस्कृति को कुचल रहा है। आज मंगोलिया व चीन के बीच सीमा पर कोई सैन्य विवाद दिख नहीं रहा पर चीन ने मंगोलिया को पूरी तरह अपने पर आश्रित बना रखा है।
रूस से भी रहा चीन का सीमा विवाद । Russia-china : Ussuri River Conflict
चीन (China Land Grabber) का अपने सभी पड़ोसियों से सीमा विवाद रहा। रूस भी इससे अछूता नहीं रहा। 1969 में रूस के साथ सीमा संघर्ष हुआ। उस्सूरी नदी पर चीन और तत्कालीन सोवियत संघ (अब रूस) के बीच भीषण सैन्य संघर्ष हुआ था। यहां चीन जीत तो नहीं दर्ज कर सका पर बाद में हुए समझौतों में उसे कुछ क्षेत्र रूस ने वापस कर दिए। वैसे चीन रूस के 15 लाख वर्ग किमी क्षेत्र को अपना बताता रहा है। 1991 से 2004 के बीच चीन व रूस के बीच कई सीमा समझौते हुए। इससे सीमा पर शांति तो आई पर चीन आज भी रूस के ‘व्लादिवोस्तोक’ शहर को अपना बताते हैं।
वियतनाम से भी छीने दो द्वीप, फिर समुद्र पर गड़ाई निगाह
भारत, रूस व मंगोलिया जैसे बड़े पड़ोसी देशों से जमीन छीनने के बाद चीन ने छोटे छोटे पड़ोसियों पर हक जमाना शुरू किया। तिब्बत के बाद चीन ने वियतनाम पर हमला किया। 1974 & 1988 में हुए सीमा संघर्ष में चीन ने वियतनाम के पारासेल और स्प्रैटली द्वीपों को छीन लिया।
दक्षिणी चीन सागर के 90 प्रतिशत भाग पर चीन का दावा । South China Sea Dispute
दक्षिण चीन सागर के लगभग 90% हिस्से पर अपना दावा करता है। जमीन पर कब्जे जमाने के बाद चीन ने समुद्र पर भी कब्जा जमाने की कवायद शुरू कर दी थी। 1949-50 में ही चीन ने दक्षिणी चीन सागर के 90 प्रतिशत हिस्से को अपना बता कर इस क्षेत्र के अन्य देशों को धौंस दिखाना शुरू कर दिया था। 1982 में देशों की समुद्री सीमा निर्धारित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संधि हुई। चीन ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया और दक्षिणी चीन सागर पर अपना दावा जारी रखा। इस क्षेत्र से दुनिया की एक तिहाई व्यापारिक गतिविधियां होती हैं।
भारत के हिमालयी क्षेत्रों पर चीन की टेढ़ी नजर
India के पूरे तराई क्षेत्र पर चीन ने कर रखा है दावा
अरुणाचल प्रदेश, भूटान, नेपाल से लेकर लद्दाख व पीओके के कुछ हिस्से शामिल
हाल ही में (2024-25 के दौरान) चीन ने भारत के **अरुणाचल प्रदेश** को ‘जंगनान’ यानि दक्षिण तिब्बत बताते हुए वहाँ के 30 से अधिक स्थानों के नाम बदल दिए। चीन का दावा है कि अरुणाचल ऐतिहासिक रूप से तिब्बत का हिस्सा रहा है, और चूंकि तिब्बत चीन का है, इसलिए अरुणाचल भी उसका है। भारत ने इसे सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि “नाम बदलने से भूगोल नहीं बदलता।” यहां खास बात यह है कि चीन भारत व तिब्बत के बीच खींची गई मैकमोहन लाइन को मान्यता नहीं देता, जो ब्रिटिश-सरकार द्वारा खींची गई थी।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार चीन ने अरुणाचल प्रदेश को ताइवान, दक्षिण चीन सागर आदि की तरह अपने *“कोर इंटरेस्ट”* की सूची में शामिल किया है । ऐसा करके चीन यह दिखाना चाहता है कि वह अरुणाचल प्रदेश को लेकर गंभीर है।
पेगोंग झील के पास चीन ने तैनात की मिसाइल । China Military Build-Up Near LAC
2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद चार साल तक चीन व भारत की सेना आमने सामने पेगोंग झील व आसपास के क्षेत्रों में तैनात रहीं। 2024 में हुए समझौतों के बाद सेनाएं पीछे तो हटीं पर हाल ही में जारी सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला कि चीन पेगोंग झील के पास अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा रहा है। यहां चीन ने पक्की इमारतें व चौड़ी सड़कें आदि बना ली हैं । साथ ही मिसाइल आदि की भी तैनाती कर ली है। भारत के संबंध सुधारने के दावे की आड़ में चीन अपनी सैन्य क्षमताओं का सीमा पर विस्तार कर रहा है.
पीओके के शक्सगाम को चीन ने बताया अपना । Shaksgam Valley: China Inside PoK
पीओके (PoK) स्थित शक्सगाम घाटी*में चीन तमाम निर्माण और सड़कें बना रहा है। 1963 में पाकिस्तान ने अवैध रूप से यह 5,180 वर्ग किमी का क्षेत्र चीन को ‘गिफ्ट’ कर दिया था। अब चीन इस क्षेत्र को अपनी संप्रभुता का हिस्सा मानकर यहाँ सैन्य बुनियादी ढांचा खड़ा कर रहा है।
निष्कर्ष ः Why China Is a Bigger Threat Than Pakistan
चीन भारत के लिए पाकिस्तान से भी बड़ा खतरा है। दोस्ती की आड़ में चीन ने 1962 में भारत पर हमला किया था। चीन अब सीधे सैन्य कार्रवाई से तो बच रहा है पर भारत को हर तरीके से कमजोर करने और उसके भौगोलिक क्षेत्रों पर कब्जा करने के लिए लगातार प्रयासरत है। ऐसी स्थिति में भारत को चीन से लगातार सावधान रहना जरूरी है। चीन को आर्थिक रूप से झटका देने के लिए चीनी सामान का लगातार बहिष्कार करना जरूरी है।
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