भारत में शादी-ब्याह का सीजन हो या निवेश की बात, ‘सोना’ हमेशा आम आदमी की पहली पसंद रहा है। लेकिन 2026 की शुरुआत भारतीय मध्यम वर्ग के लिए एक कड़वी हकीकत लेकर आई है। जहां एक औसत भारतीय परिवार के लिए सोने की एक अंगूठी खरीदना भी अब बजट से बाहर होने लगा है, वहीं दुनिया के एक कोने में बैठी एक ऐसी टेक कंपनी है जो सोने की कीमतों (Gold Price) को आसमान पर पहुंचाने की बड़ी वजह बनी हुई है।
यह कहानी है Tether Holdings SA की, जो हर महीने इतना सोना खरीद रही है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी हैरान हैं।
आम आदमी की पहुंच से बाहर होता सोना (Gold Price) और ‘Tether’ का दखल
भारतीय सर्राफा बाजारों में सन्नाटा पसरने लगा है क्योंकि सोने की कीमतें (Gold Price) अब मध्यम वर्ग की पहुंच से कोसों दूर निकल चुकी हैं। लेकिन जब आम आदमी खरीदारी से पीछे हट रहा है, तब डिजिटल मुद्रा (USDT) जारी करने वाली कंपनी **Tether** दुनिया की सबसे बड़ी स्वर्ण खरीदार बनकर उभरी है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों (Gold Price) में आ रहे इस भारी उछाल के पीछे टेदर जैसी कंपनियों की ‘आक्रामक खरीदारी’ एक प्रमुख कारण है। टेदर वर्तमान में हर सप्ताह **1 से 2 टन सोना** खरीद रही है। यानी हर महीने लगभग **1 अरब डॉलर (करीब 8,300 करोड़ रुपये)** सिर्फ सोने की ईंटें जमा करने पर खर्च किए जा रहे हैं।
Tether ने स्विस परमाणु बंकर में छिपाया ‘सोने का पहाड़’

टेदर (Tether) ने अपना यह विशाल खजाना किसी साधारण बैंक की तिजोरी में नहीं, बल्कि स्विट्ज़रलैंड के आल्प्स पर्वतों के भीतर बने एक **पुराने परमाणु बंकर** में छिपा रखा है। ‘जेम्स बॉन्ड’ फिल्मों की याद दिलाने वाली इस जगह पर तीन-टन वजनी इस्पाती दरवाजों के पीछे करीब **140 टन सोना** जमा हो चुका है।
2025 में जब आम भारतीय अपनी बचत को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था, तब इस कंपनी ने अकेले **70 टन सोना** अपने भंडार में जोड़ लिया। टेदर के पास आज इतना सोना है कि वह कई विकसित देशों के सरकारी खजाने को भी पीछे छोड़ चुका है।